वीआईपी मूवमेंट में बड़ी चूक
बरेली में वीआईपी मूवमेंट के दौरान डिप्टी सीएम केशव मौर्य की कार गाय से टकराई, सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल।
➡️ पीलीभीत बाईपास पर डिप्टी सीएम की कार गाय से टकराई
➡️ वीआईपी मूवमेंट के बावजूद सड़क पर छुट्टा पशु
➡️ कार का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त
➡️ डिप्टी सीएम सुरक्षित, दूसरी गाड़ी से एयरपोर्ट रवाना
➡️ सुरक्षा व्यवस्था और रूट क्लीयरेंस पर बड़ा सवाल
हसीन दानिश/ जन माध्यम।
बरेली। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य की सुरक्षा में शनिवार को जो हुआ, वह महज़ एक दुर्घटना नहीं बल्कि पूरे वीआईपी सुरक्षा तंत्र पर करारा तमाचा है। पीलीभीत बाईपास पर बजरंग ढाबे के पास अचानक एक गाय उनकी कार के सामने आ गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि वाहन का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। सौभाग्य से डिप्टी सीएम बाल बाल बच गए, लेकिन यह सवाल अब हवा में तैर रहा है कि अगर ज़रा सी चूक और होती तो जिम्मेदारी किसकी होती? घटना के समय डिप्टी सीएम बरेली से एयरपोर्ट जा रहे थे। वीआईपी मूवमेंट, हाई सिक्योरिटी, पुलिस एस्कॉर्ट सब कुछ मौजूद था, फिर भी सड़क पर छुट्टा जानवर आ जाना सुरक्षा व्यवस्था की घोर विफलता को उजागर करता है। हादसे के तुरंत बाद सुरक्षा कर्मियों ने फुर्ती दिखाते हुए डिप्टी सीएम को दूसरी गाड़ी में बैठाया और एयरपोर्ट रवाना किया, लेकिन सवाल यह नहीं है कि बाद में क्या किया गया, सवाल यह है कि पहले चूक क्यों हुई? शनिवार को डिप्टी सीएम मौर्य का कार्यक्रम बेहद व्यस्त रहा। उन्होंने बरेली में दिवंगत विधायक श्याम बिहारी लाल के परिवार से मुलाकात की, प्रेसवार्ता की, फरीदपुर में ‘वीबी जी राम जी’ अधिनियम को लेकर ग्राम चौपाल में शामिल हुए और फिर बदायूं जाकर बिल्सी विधायक हरीश शाक्य की माता के निधन पर शोक व्यक्त किया। इसके बाद जब वे लौट रहे थे, तभी यह गंभीर घटना सामने आई। सवाल यह है कि इतने बड़े स्तर के मूवमेंट के बावजूद रूट की पूरी तरह से जांच क्यों नहीं की गई?
प्रशासनिक लापरवाही या सिस्टम फेल? डीएम अविनाश सिंह ने घटना को गंभीर मानते हुए नगर आयुक्त को पत्र भेजने की बात कही है, लेकिन क्या सिर्फ पत्र भेज देना काफी है? बरेली शहर और उसके आसपास सड़कों पर घूमते छुट्टा जानवर कोई नई समस्या नहीं हैं। स्थानीय लोग बार बार शिकायत करते रहे हैं, लेकिन प्रशासन की उदासीनता जस की तस बनी रही। जब डिप्टी सीएम की गाड़ी सुरक्षित नहीं है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या हाल होगा? वीआईपी सुरक्षा सिर्फ काफिले तक सीमित नहीं सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि वीआईपी मूवमेंट में केवल गाड़ियों की संख्या बढ़ा देना सुरक्षा नहीं कहलाता। रूट क्लीयरेंस, पशु नियंत्रण, सड़क निरीक्षण और लगातार निगरानी उतनी ही जरूरी होती है। इस मामले में साफ है कि या तो समन्वय की कमी थी या जिम्मेदारी को हल्के में लिया गया।
यह घटना एक चेतावनी है आज यह एक गाय से टकराव तक सीमित रही, कल कोई बड़ा हादसा भी हो सकता है। सवाल अब साफ है क्या प्रशासन सबक लेगा या फिर अगली चूक का इंतजार करेगा? बरेली प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को इस घटना को मामूली मानने की भूल नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अगली बार किस्मत साथ दे, इसकी कोई गारंटी नहीं।